हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अ.स.) के महान जीवन, उच्च चरित्र और सार्वभौमिक संदेश को केंद्र में रखते हुए कोलकाता के मौलाना अली यूथ सेंटर में ‘ख़ातून-ए-जन्नत सेमिनार’ का सफल आयोजन किया गया। इस सेमिनार का आयोजन मजमा-ए-तक़रीब और नूरुल इस्लाम अकादमी द्वारा, हाउसिंग डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का संपादन एवं समन्वय डॉ. मौलाना रिज़वानुस सलाम ख़ान ने किया।
सेमिनार का विशेष आकर्षण ईरान से पधारे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त क़ारी-ए-क़ुरआन पैमान ख़ैरख़्वाह की भावपूर्ण क़ुरआन तिलावत रही, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिकता से सराबोर कर दिया।
‘हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अ.स.) का प्रकाशमान जीवन’ विषयक विचार-गोष्ठी में प्रसिद्ध इस्लामी चिंतक डॉ. सैयद मोहसिन रज़ा अब्दी, मौलाना अब्दुर रऊफ़, मौलाना अमीनुल अंबिया तथा प्रख्यात हिंदू विद्वान प्रो. मदन चंद्र करण ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने सामाजिक न्याय, नारी गरिमा, त्याग, सत्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों की स्थापना में हज़रत फ़ातिमा (अ.स.) की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में महिला वक्ता के रूप में फ़र्ज़ाना फ़ातिमा ख़ान ने समकालीन समाज में महिलाओं की आत्मसम्मान-युक्त पहचान और नैतिक सशक्तिकरण के लिए हज़रत फ़ातिमा (अ.स.) के आदर्श को प्रेरणास्रोत बताया।
साहित्यिक सत्र में ‘फ़ातिमा (अ.स.) की महानता’ विषय पर काव्य-पाठ हुआ, जिसमें कवि गुलशन साहब, मुश्ताक़ अहमद सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
इस अवसर पर ‘जन्नती हूर: हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अ.स.)’ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन किया गया। साथ ही आयोजकों की ओर से प्रकाशित पुस्तकों और ‘सत्य के पथ पर’ पत्रिका का वितरण भी किया गया।
समारोह के अंतिम चरण में ‘ख़ातून-ए-जन्नत पुरस्कार’ प्रसिद्ध विद्वान डॉ. सैयद मोहसिन रज़ा अब्दी को प्रदान किया गया तथा ईरानी क़ारी पैमान ख़ैरख़्वाह को भी विशेष सम्मान से नवाज़ा गया। इसके अलावा आयोजित निबंध प्रतियोगिता में भाग लेने वाले 34 प्रतिभागियों में से प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को विशेष पुरस्कार दिए गए, जबकि अन्य सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किए गए।
विभिन्न ज़िलों से आए बड़ी संख्या में लोगों, विशेषकर महिलाओं की उल्लेखनीय सहभागिता के साथ यह सेमिनार अत्यंत सफल रहा और नए वर्ष के आरंभ में समाज को नैतिकता, सद्भाव और मानवता का सशक्त संदेश देने में सफल सिद्ध हुआ।
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